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आप सुझाये, मै मेडीसिनल प्लांट के लिये दुनिया मे कही भी जा सकती हूँ

आप सुझाये, मै मेडीसिनल प्लांट के लिये दुनिया मे कही भी जा सकती हूँ प्रश्न: I have a great interest in Aromatic and Medicinal Plants, have taken few Plant Biotechnology courses . I want to fulfill my Father's dream of planting medicinal plants in large scale at our home state Orissa. I am looking for the Universities where I can learn advanced way of plantation of medicinal and aromatic plants . I am ready to go any university around the world to pursue this course. It will be great if you can suggest me some good university and courses which I can pursue related to this. As you have done research in medicinal and aromatic plans for a long time, it will be my fortune to get advice from you. Presently I am studying in USA. उत्तर: आपके सन्देश के लिये धन्यवाद। जैसा कि आपने लिखा है कि आप अभी अमेरिका मे अपनी पढाई कर रही है, आप इसे पूरी करे। सही मायने मे पूछे तो मै आपको माँ प्रकृति के विश्वविद्यालय मे दाखिल होने की सलाह दूंगा। इसी विश्वविद्यालय मे आपको औषधीय और सगन्ध वनस्पतियो के विषय मे ...

ब्राम्ही के सप्लायर और इससे बनाने वाले पेय़ के विषय़ मे जानकारी चाहिये

ब्राम्ही के सप्लायर और इससे बनाने वाले पेय़ के विषय़ मे जानकारी चाहिये प्रश्न: Dear Sir, While searching for possible Bacopa suppliers, I came across your articles on the said subject. I was very impressed with your honesty and in depth knowledge on the said subject. I could not resist myself in writing to you for help. We are looking for Brahmi Extract to be used in a Non-Alcoholic Energy Drink. We would be highly grateful to your good self if you could guide us with your inputs as to how to use it and its specifications. It would be kind on your part if you could refer us to some reliable suppliers for the same. उत्तर: आपके सन्देश के लिये धन्यवाद। मै इस विषय़ मे आपका मार्गदर्शन कर सकता हूँ। आप abhayable@gmail.com पर मेरे निज सहायक को यह सन्देश भेजे। इस सन्देश मे आप अपना पूरा पता दे। निज सहायक आपको मिलने का समय और सलाह शुल्क आदि की पूरी जानकारी प्रेषित कर देगा। चूँकि सन्देशो की लम्बी कतार रहती है इसलिये आपको उत्तर मिलने मे कुछ देरी हो सकती है। भूमिका: इंटरनेट पर हजारो शोध दस्तावेज हो...

फैगोनिया पर जानकारी चाहिये शोध के लिये

भूमिका: इंटरनेट पर हजारो शोध दस्तावेज होने के कारण प्रतिदिन सैकडो ई-मेल आते रहते है। सभी चाहते है कि उन्हे जवाब मिले और वह भी बिना देरी के। एक सहायक रखा है पर फिर भी सन्देशो का ढेर बढता जाता है। मै देश के कृषि पत्रिकाओ मे भी लिखता हूँ इसलिये किसान भी बडी संख्या मे पत्र भेजते रहते है। मै ई-मेल सन्देशो की बजाय इन पत्रो को अधिक प्राथमिकता देता हूँ। एक सन्देश का जवाब देना यानि प्रेषक से सम्वाद का स्थापित होना। प्रेषक बार-बार लिखते है। फोन कालो की भी बाढ आयी रहती है। घर पर भी आगंतुको का मेला लग जाता है। इसलिये मैने इस ब्लाग के माध्यम से कुछ चुने हुये प्रश्नो का उत्तर देने की योजना बनायी है। प्रश्न किसी भी भाषा मे हो उत्तर हिन्दी मे देने की व्यवस्था रहेगी। प्रश्न: Dear Pankaj Oudhia. I am currently undertaking a research project investigating the potential chemotherapeutic potential and the mechanisms of bioactivity of a species of Fagonia. I have come across your page during a Google search and am inquiring if you have any references for information on the folklore and historical uses of ...

क्या महंगे विदेशी फलो के खराब निकलने की समस्या से आप भी जूझ रहे है?

क्या महंगे विदेशी फलो के खराब निकलने की समस्या से आप भी जूझ रहे है? - पंकज अवधिया आजकल भारतीय शहरो मे स्टीकर लगे विदेशो से आयातित फल धडल्ले से बिक रहे है। इसका नियमित प्रयोग सबके बस की बात नही है क्योकि ये बहुत महंगे होते है। मसलन अभी रायपुर मे अयातित सेव का दाम 120 रुपये किलो है और एक किलो मे मुश्किल से पाँच सेव चढते है। फुटकर मे देखे तो 20-30 रुपये का एक सेव। आजकल चिकित्सक मरीजो को इन्ही महंगे फलो को उपयोग मे लाने की सलाह दे रहे है। यही कारण है कि सुबह विदेशी फलो से सजी दुकान शाम तक खाली हो जाती है। कुछ दिनो पहले एक मित्र के साथ मै फलो की दुकान पर पहुँचा। आयातित नाशपाती लेने का मन हुआ। एक-एक किलो हमने ले लिया। घर जाकर जब उसे काटा तो अन्दर फलो की स्थिति इस चित्र की तरह थी। यह खाने लायक नही था । ज्यादातर फल ऐसे ही निकले। हम उल्टे पैर वापस लौटे। फल महंगा था इसलिये फल वाले ने तुरंत इन्हे वापस ले लिया और बदले मे उसी जगह से दूसरे फल दे दिये। दुर्भाग्यवश नये फलो मे भी वही समस्या दिखी। फल वाले ने कहा कि आजकल इस “बीमारी” की शिकायत बहुत आ रही है। मै...

विकास, छत्तीसगढ और पितृ वृक्ष

“छत्तीसगढ मे तथाकथित विकास की बलिवेदी पर चढाये गये जीवनदाता वृक्ष” ये लेखमाला आज से मेरी प्रतिक्रिया ब्लाग पर आरम्भ हुयी है। यह लेखमाला उन असंख्य बेजुबान वृक्षो को समर्पित है जिन्होने अपना जीवन पीढीयो तक मानव सेवा के लिये दे दिया। पर आज इस पीढी के आधुनिक सोच वाले योजनाकारो ने तथाकथित विकास के नाम पर इन्हे जड से काटने मे जरा भी देर नही लगायी। यह सम्भव था कि आज विकास के इस युग मे ये भी हमारे बीच रहते पर ऐसे सारे विकल्पो की अनदेखी कर दी गयी। मैने अपना जीवन इन पितृ वृक्षो के साये मे गुजारा है और अब भी गुजार रहा हूँ। इस लेखमाला के माध्यम से मै इन पुण्य आत्माओ से ज़ुडी बातो को नम आँखो से याद करने का प्रयास कर रहा हूँ। Updated Information and Links on March 05, 2012 New Links :  http://www.scribd.com/doc/ 83154451/Remedial-Measures- for-Toxicity-of-Traditional- Herbal-Medicines-Recent- Topics-in-Pankaj-Oudhia%E2%80% 99s-Medicinal-Plant-Database- Part-1 http://www.scribd.com/doc/ 83041234/New-Topics-in-Pankaj- Oudhia%E2%80%99s-Medicinal- Plant-Database Related Topics in...

क्या बीटी बैगन के अलावा कोई विकल्प नही है?

क्या बीटी बैगन के अलावा कोई विकल्प नही है? - पंकज अवधिया एक विशेष प्रकार के कीडो के लिये विकसित किये गये बीटी बैगन की जरुरत क्या सचमुच भारतीय किसानो को है? क्या उन कीडो का नियंत्रण इतना मुश्किल हो गया है कि हम करोडो भारतीयो की जान दाँव पर लगाकर बीटी बैगन को भारत मे लाने व्यग्र है? यदि वैज्ञानिको से यह सवाल पूछा जाये तो वे शायद कहे कि हाँ, हाँ यह जरुरी है। पर बैग़न की खेती कर रहे किसान ऐसा नही कहेंगे। यह मेरा सौभाग्य है कि मै बैगन की पारम्परिक खेती कर रहे हजारो भारतीय किसानो से मिला हूँ। उनके पास गजब का पारम्परिक ज्ञान है। वे बिना किसी रसायन के बैगन को कीटो से बचा रहे है। उनके ज्ञान का यदि दस्तावेजीकरण किया जाये तो कृषि शोध संस्थानो के भवन छोटे पड जायेगे इन्हे रखने के लिये। ये महज किताबी ज्ञान नही है। किताबी ज्ञान होता तो न जाने कब का अतीत की गहराईयो मे खो जाता। यह ज्ञान खेतो मे फसलो पर प्रयोग हो रहा है और पीढी दर पीढी निखर रहा है। यह ज्ञान बैगन को कीटो से सदियो तक बचा सकता है। यह ज्ञान देश की असंख्य वनस्पतियो से सम्बन्ध...

क्या आप बीटी बैगन के लिये प्रयोगशाला जीव बनने तैयार है?

क्या आप बीटी बैगन के लिये प्रयोगशाला जीव बनने तैयार है? - पंकज अवधिया अब एक बार फिर देश मे बीटी फसल की चर्चा है। इस बार बीटी बैगन आ रहा है। आ रहा है या कहे, आ गया है। समर्थक और विरोधी मोर्चे पर डटे हुये है। चूँकि यह क्लिष्ट तकनीकी विषय है इसलिये आम जनता इससे अंजान है। किसी ने उन्हे सरल भाषा मे समझाया नही। पर यह भी नग्न सत्य है कि इस बीटी बैगन को खाना उन्हे ही है। वैसे हमारे देश मे आम जनता से पूछने की परम्परा नही है। जनता नेताओ को चुन लेती है और वैज्ञानिक नेताओ से चिपक जाते है। बस ये दोनो ही आम जनता से पूछे बिना पाँच वर्षो तक अपना राज चलाते है। जनता मे से कोई पूछता है तो तकनीकी बाते करके उन्हे चुप कर दिया जाता है। पूरा लेख यहाँ पढे

कृषि होम्योपैथी पर हाल ही मे तैयार की गयी फिल्मे

Recent Films and Film strips on Agrohomoeopathic Experiments. Oudhia, P. (2008). Agrohomoeopathic Experiments: Use of Homoe-Drug ARNICA in commercial cultivation of Indian medicinal and aromatic crops. 1. Tulsi (Ocimum sanctum). CGBD (Offline Database on Chhattisgarh Biodiversity), Raipur, India. Oudhia, P. (2008). Agrohomoeopathic Experiments: Use of Homoe-Drug ARNICA in commercial cultivation of Indian medicinal and aromatic crops. 2. Hadjod (Cissus quadrangularis). CGBD (Offline Database on Chhattisgarh Biodiversity), Raipur, India. Oudhia, P. (2008). Agrohomoeopathic Experiments: Use of Homoe-Drug ARNICA in commercial cultivation of Indian medicinal and aromatic crops. 3. Kali Musli (Curculigo orchioides). CGBD (Offline Database on Chhattisgarh Biodiversity), Raipur, India. छत्तीसगढ की जैव-विविधता पर हाल ही मे तैयार की गयी फिल्मो की जानकारी इस पते पर मिल सकेगी। http://cgbiodiversity.blogspot.com/2009/01/recent-films-and-film-strips-on.html

--- तो इसलिये नष्ट किया जा रहा रतनजोत (जैट्रोफा) भारतीय किसानो द्वारा

--- तो इसलिये नष्ट किया जा रहा रतनजोत (जैट्रोफा) भारतीय किसानो द्वारा - पंकज अवधिया कुछ दिनो पहले राजधानी के पास बडी तादाद मे उखाडे गये रतनजोत को देखकर मैने गाडी रुकवायी। रतनजोत को इस हालत मे मैने कभी नही देखा था। मेरे चालक ने कहा कि हो सकता है कि जलाउ लकडी के रुप मे इसका उपयोग होने लगा हो और इसलिये लोग इसे काटकर सुखा रहे हो। पर रतनजोत मे लेटेक्स होने के कारण यह अधिक उपयोगी जलाउ लकडी नही है। मैने तस्वीरे ली और आस-पास के लोगो से पूछा पर शायद सरकारी साहब समझ पर वे सहम से गये। कुछ आगे बढे तो रतनजोत के पौधो के ऐसे ढेर दिखे जिन्हे जलाया जा रहा था। लोगो ने बताया कि हम किसान है। सरकारी विभागो ने खेत की मेडो पर इसे लगा दिया था। खाद पानी मिलने से इन्होने राक्षसी रुप धारण कर लिया। फिर ये खेतो मे घुसने लगे। खेतो मे तो परम्परगत फसले होती है और रतनजोत क्या, किसी भी घुसपैठिये को अन्दर आने की अनुमति नही देते है किसान। सो उन्होने अन्य खरपतवारो की तरह इसे भी उखाडा और जला दिया। मेरे कहने से पहले ही वे बोले कि यदि इसी रफ्तार से इसे रोपा जाता रहा तो ये अधिक ताकत से अ...

कम से कम ऐसी अनदेखी तो न करे गाजर घास के प्रकोप की?

कम से कम ऐसी अनदेखी तो न करे गाजर घास के प्रकोप की? - पंकज अवधिया गाजर घास के प्रकोप के बीच काम करना आसान नही है। उन्होने बताया कि इसे उखाडने के बाद सिर और सारा शरीर भारी लगने लगता है। आँखो मे कडवाहट भर जाती है। शायद उन्हे इस बात की जानकारी नही थी कि गाजर घास से सबसे बडा खतरा एलर्जी का है। त्वचा प्रदाह और साँस के रोग सबसे पहले पकडते है। मैने उन्हे यह जानकारी दी तो वे बोले कि सर्दी तो रहती ही है पर यह नही पता चल रहा था कि अचानक से क्यो शुरु हो गयी है यहाँ काम पर आने के बाद। वहाँ काम कर रहे दूसरे मजदूरो ने बताया कि शहरो से जो खाद लायी गयी उसके साथ गाजर घास के बीज यहाँ तक पहुँचे। पहले गिनती के पौधे थे पर अब तो जैसे उनका राज ही हो गया है। पूरा लेख इस कडी पर पढे http://ecoport.org/ep?SearchType=earticleView&earticleId=3178&page=-2 Updated Information and Links on March 05, 2012 New Links :  http://www.scribd.com/doc/ 83154451/Remedial-Measures- for-Toxicity-of-Traditional- Herbal-Medicines-Recent- Topics-in-Pankaj-Oudhia%E2%80% 99s-Medicinal-Plant-Database- Pa...

गाजर घास पर पत्रक का गूगल द्वारा अनुवाद

घातक खरपतवार गाजर घास पर हम लोग मासिक पत्रक का प्रकाशन कर रहे है आन-लाइन। कल जारी होने वाले पत्रक को यूँ ही जब मैने गूगल ट्रांसलेशन मे आजमाया तो काफी हद तक सही अनुवाद प्राप्त हुआ। वीड को जगह-जगह छाँट और तम्बाकू के रुप मे अनुवादित किया गया है। जबकि सही अनुवाद है खरपतवार। अनुवाद मै नीचे दे रहा हूँ। मूल पत्रक जो अंग्रेजी मे है इसे आप इस कडी पर देखे। http://ecoport.org/ep?SearchType=earticleView&earticleId=3177&page=12367 गूगल द्वारा किया गया अनुवाद अंतर्राष्ट्रीय समाचार Parthenium अनुसंधान [ IPRN ] वॉल्यूम . 1 No.2 1 जुलाई , 2008 अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान Parthenium News एक मुफ़्त है , वैश्विक मासिक समाचार पत्र पर अप्रिय छाँट Parthenium hysterophorus . यह प्रकाशित की मदद से अंतर्राष्ट्रीय समाचार Parthenium अनुसंधान समूह [ IPRNG ] . योगदानकर्ताओं के लिए बहुमूल्य योगदान के लिए धन्यवाद . > सम्पादकीय इस महीने के वैज्ञानिक Parthenium -- डॉ. सुशील कुमार घोषणा -- छाँट के भविष्य के अनुसंधान में ब्रिटेन . -- छाँट दिवस 2008-06-27 -- कांग्रेस पर पांचवें विश्व Allelopathy नई प्रकाशन पर Part...

क्या ऐसा ही कृषि अनुसन्धान चाहते है भारतीय किसान?

इस लेख को आप इकोपोर्ट पर पढ सकते है। देश भर मे छप रहे और छप चुके इस लेख पर व्यापक प्रतिक्रियाए हुयी है। पीडीएफ मे उपलब्ध इस लेख को आप इस कडी पर जाकर पढ सकते है। http://ecoport.org/ep?SearchType=reference&ReferenceID=557479

बच के भारतीय किसानो 'नोनी माफिया' आपकी तलाश मे है

कैसे नोनी की खेती के दिवास्वप्न दिखा कर भारतीय किसानो को ठगने की तैयारी चल रही है, इस पर केन्द्रित यह लेख देश भर मे छप चुका है। आप इकोपोर्ट की इस कडी पर जाकर पीडीएफ मे उपलब्ध इस लेख को पढ सकते है। http://ecoport.org/ep?SearchType=reference&ReferenceID=557425 Updated Information and Links on March 05, 2012 New Links :  http://www.scribd.com/doc/ 83154451/Remedial-Measures- for-Toxicity-of-Traditional- Herbal-Medicines-Recent- Topics-in-Pankaj-Oudhia%E2%80% 99s-Medicinal-Plant-Database- Part-1 http://www.scribd.com/doc/ 83041234/New-Topics-in-Pankaj- Oudhia%E2%80%99s-Medicinal- Plant-Database Related Topics in Pankaj Oudhia’s Medicinal Plant Database at  http://www.pankajoudhia.com Celastrus paniculatus as important ingredient of Pankaj Oudhia’s Complex Herbal Formulations (Indigenous Traditional Medicines) used in treatment of Type II Diabetes (Madhumeh) with Sudhoul And Dronpushpi as Primary Ingredients (Research Documents on Medicinal Plants ...

गाजर घास पर आन-लाइन मासिक पत्रिका का प्रकाशन

दुनिया के दस सबसे खतरनाक माने जाने वाले खरपतवारो मे से एक गाजर घास (पार्थेनियम हिस्टेरोफोरस) के विभिन्न पहलुओ पर काम कर रहे वैज्ञानिको, किसानो, स्वयमसेवियो, छात्रो सभी के बीच नवीनतम जानकारियो के आदान-प्रदान के लिये एक जून, 2008 से एक आन-लाइन मासिक पत्रिका का प्रकाशन किया जा रहा है। इसका नाम इंटरनेशनल पार्थेनियम रिसर्च न्यूज है। यह पत्रिका अंग्रेजी मे प्रकाशित होगी पर शीघ्र ही इसे हिन्दी मे भी प्रकाशित किया जायेगा। यह नि:शुल्क उपलब्ध रहेगी। आप सभी से अनुरोध है कि अपना योगदान लेखो, समाचारो आदि के रुप मे दे। प्रथम अंक के लिये अंतिम तिथि है 25 मई, 2008. योगदान इस पते पर भेजे pankajoudhia(at)gmail.com

'गाजर घास : एक घातक शत्रु ' अब आनलाइन

मैने 1997 मे 'गाजर घास : एक घातक शत्रु ' नामक हिन्दी पुस्तक लिखी थी। अब इस पुस्तक को इंटरनेट पर उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहा हूँ। इसी कडी मे इसका प्रथम अध्याय गाजर घास पर आधारित दुनिया की पहली वेबसाइट मे प्रकाशित किया है। आप आमंत्रित है इसे पढने के लिये। गाजर घास :एक घातक शत्रु. अध्याय-1 http://www.iprng.org/DetailArticlesWork.aspx?id=93

रतनजोत उखाडकर नष्ट करने का फरमान, आओ! मेरठ प्रशासन का करे सम्मान

पिछले दिनो मेरठ से खबर आयी कि स्थानीय प्रशासन ने आम निवासियो से अनुरोध किया है कि वे अपने आस-पास उग रहे रतनजोत को उखाड फेके। जहाँ एक ओर पूरे देश मे डीजल के विकल्प के रुप मे इस पौधे को लगाया जा रहा है ऐसे मे इस तरह का फरमान सामने आये तो इससे सबका चौकना तय था। समाचार के अनुसार मेरठ के आस-पास बच्चो द्वारा रतनजोत के बीज को खाकर बीमार होने के पचास से अधिक मामले सामने आये तो नाराज पालको ने प्रदर्शन किया। इसी को देखते हुये प्रशासन ने रतनजोत के नुकसान को भाँपते हुये इसे तुरंत ही उखाडने का निर्देश दे दिया। रतनजोत (जैट्रोफा) के दुष्प्रभावो को जानने वाले ऐसे फरमानो की उम्मीद बहुत वर्षो से कर रहे थे। आज पूरे देश मे आम लोगो को इस जहरीले पौधे के विषय मे पूरी जानकारी दिये बिना ही व्यापक पैमाने पर इसे लगाया जा रहा है। परिणामस्वरुप इसके हानिकारक प्रभाव सामने आने लगे। आज यह कोई नही बता पा रहा है कि रतनजोत से बायोडीजल कब बनेगा पर मनुष्यो से लेकर वन्य प्राणियो तक सभी के लिये यह विदेशी पौधा अभिशाप बनता जा रहा है। आज सारा देश क्रिकेट, फिल्मो और राजनीति पर चर्चा कर रहा है। ऐसे मे बहुत कम लोग जानते...

तिलहन फसल अलसी के अंकुरण पर गाजर घास का प्रभाव

घातक खरपतवार गाजर घास पर शोध सन्दर्भ- 3 Oudhia, P., Kolhe, S.S. and Tripathi, R.S. (1997). Allelopathic effect of Parthenium hysterophorus L. on germination of Linseed . Indian J. Plant Physiol. 2 (4). 327-329. यह शोध पत्र गाजर घास से तैयार विभिन्न सत्वो के तिलहन फसल अलसी के अंकुरण पर होने वाले दुष्प्रभावो को दर्शाता है। इस प्रयोग से यह जानने मे सहायता मिलती है कि गाजर घास का कौन सा भाग इस फसल के लिये अधिक नुकसानदायक है। यह शोध पत्र उस शोध कार्य पर आधारित है जो मैने इंदिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर मे पढाई के दौरान किया था। मूल शोध पत्र देश-विदेश के सभी पुस्तकालयो मे उपलब्ध है। [गाजर घास पर आधारभूत जानकारी के लिये इंटरनेशनल पार्थेनियम रिसर्च न्यूज ग्रुप की वेबसाइट पर जाये।]

गाजर घास का सरसो, कोदो और अन्य खरपतवारो पर दुष्प्रभाव

घातक खरपतवार गाजर घास पर शोध सन्दर्भ- 2 Oudhia, P. and Tripathi, R.S. (1998). Allelopathic effects of Parthenium hysterophorus L. on Kodo , Mustard and problematic weeds . First International Conference on Parthenium Management (Vol. II) UAS, Dharwad 6-8 Oct. 1997: 136-139. यह शोध पत्र गाजर घास से तैयार विभिन्न सत्वो के कोदो और सरसो की फसल के अंकुरण और पौध ओज पर होने वाले दुष्प्रभावो को दर्शाता है। इस प्रयोग से यह जानने मे सहायता मिलती है कि गाजर घास का कौन सा भाग इन फसलो के लिये अधिक नुकसानदायक है। कोदो और सरसो के अलावा गाजर घास के सत्वो का प्रभाव हानिकारक खरपतवारो के अंकुरण और पौध ओज पर भी देखा गया। इससे यह जानने मे सहायता मिलती है कि गाजर घास का प्रयोग अन्य खरपतवारो के विनाश मे कैसे किया जा सकता है। यह शोध पत्र उस शोध कार्य पर आधारित है जो मैने इंदिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर मे पढाई के दौरान किया था। मूल शोध पत्र देश-विदेश के सभी पुस्तकालयो मे उपलब्ध है। [गाजर घास पर आधारभूत जानकारी के लिये इंटरनेशनल पार्थेनियम रिसर्च न्यूज ग्रुप की वेबसाइट पर जाये।]

गाजर घास का चने की फसल पर दुष्प्रभाव

घातक खरपतवार गाजर घास पर शोध सन्दर्भ-1 Oudhia, P., Kolhe, S.S. and Tripathi, R.S. (1997). Allelopathic effect of white top ( Parthenium hysterophorus L. ) on chickpea . Legume Research. 20 (2): 117-120. यह शोध पत्र गाजर घास से तैयार विभिन्न सत्वो के चने की फसल के अंकुरण और पौध ओज पर होने वाले दुष्प्रभावो को दर्शाता है। इस प्रयोग से यह जानने मे सहायता मिलती है कि गाजर घास का कौन सा भाग इस फसल के लिये अधिक नुकसानदायक है। यह शोध पत्र उस शोध कार्य पर आधारित है जो मैने इंदिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर मे पढाई के दौरान किया था। मूल शोध पत्र देश-विदेश के सभी पुस्तकालयो मे उपलब्ध है। लेग्यूम रिसर्च एक अंतरराष्ट्रीय पत्रिका है।

आइये! गाजर घास मुक्त भारत का स्वप्न साकार करे

गाजर घास के साथ मेरे दो दशक (भाग-27, अंतिम भाग ) - पंकज अवधिया गाजर घास के साथ बीते दो दशको ने काफी सबक सीखाये। मैने इस खरपतवार के विभिन्न पहलुओ को करीब से जाना। इस पर अनुसन्धान किया और अपनी क्षमता के अनुसार आम लोगो को जागृत किया। दुनिया भर के गाजर घास के विशेषज्ञ आज एक मंच पर तो आ गये है पर अभी भी उनमे आपस संवादहीनता की स्थिति है। आने वाले समय मे मेरा यह प्रयास रहेगा कि मै इस संवादहीनता को दूर कर उन्हे लगातार चर्चा करने के लिये प्रेरित करुँ। गाजर घास पर सैकडॉ विशेषज्ञ कार्य कर रहे है पर बहुत कम विशेषज्ञ ऐसे है जो केवल गाजर घास पर काम कर रहे है। जो दिन-रात, सोते-उठते सिर्फ इसके विषय मे सोचते रहते है। जिस तेजी से गाजर घास फैल रही है उसे देखते हुये ऐसे समर्पित विशेषज्ञो की फौज तैयार करने की जरुरत है। ऐसी फौज उन स्वयमसेवियो की भी बनाने की आवश्यकत्ता है जो आत्म प्रेरणा से गाजर घास पर काम करना चाहते है पर उन्हे कही से प्रोत्साहन नही मिल रहा है। यह आम लोगो के साथ समस्या है कि वे जल्दी से समस्याओ को भूल जाते है और नयी समस्याओ मे उलझ जाते है। हमारा मीड...