आखिर कब होगी किसानोपयोगी शोध की शुरूआत?
आखिर कब होगी किसानोपयोगी शोध की शुरूआत? -पंकज अवधिया पिछले दिनो जब मैने इंटरनेट पर बथुआ पर एक अतिथि लेख लिखा तो बहुत सारे सन्देश आये। चूँकि ज्यादतर शहरो मे ही इंटरनेट का उपयोग करने वाले है अत: प्रश्न पूछने वाले कुछ लोग ही बथुआ से अंजान थे। ज्यादातर ने बताया कि सुबह-सुबह ही यह मंडियो मे बिकने आता है और हाथो-हाथ बिक जाता है। किसी ने इलाहाबाद मे 10 रूपये मे 3 गाँठ मिलती है लिखा तो हरियाणा से इतने रूपये मे केवल एक ही गाँठ मिलने की बात कही गई। सन्देशो से यह भी पता चला कि पराठो, भाजी और भजिये के अलावा इससे तैयार रायता भी बहुत पसन्द किया जाता है। इन सन्देशो से प्रेरित होकर जब मै मंडी गया और विक्रेताओ से बात की तो पता चला कि वे इसे आस-पास के किसानो से ख्ररीद लेते है। कुछ ने तो यह भी कहा कि हम इसकी खेती करते है बडे पैमाने पर। वापस आकर बथुआ की देशी और विदेशी बाजार मे वार्षिक माँग के आँकडो का अध्ययन किया तो पता चला कि वर्ष दर वर्ष इसकी माँग बढ रही है। क्यो बढ रही है? क्योकि न केवल भारत बल्कि बहुत से दूसरे देशो मे इस पर नित नये अनुसन्धान हो रहे है। अ...